ये इश्क़
महबूब का दीदार कर ख़ुदा को भूल जाना इश्क़ है,
उसकी बेवफ़ाई पर भी उसे रुसवा ना कर पाना इश्क़ है।
उसका इनकार या इक़रार दोनों को समझ जाना इश्क़ है,
सब-कुछ होने पर भी उसकी यादों में खोए रहना इश्क़ है,
ग़म दिल में लेकर उसकी खुशियों में मुस्कुराना इश्क़ है,
मालूम है कि वो अपना नही फिर भी उसे ही चाहना इश्क़ है,
तनहाई में आंसू बहाना और महफ़िल में मुस्कुराना इश्क़ है,
दिल में बसा कर चेहरा उसका किसी और को ना देखना इश्क़ है,
उसकी बदग़ुमानी पर भी माथे पर शिक़न ना आना इश्क़ है,
सौदा कोई जिस्म का नहीं उसकी रूह में बस जाना इश्क़ है
उसकी यादों के सहारे खुद को बहलाना इश्क़ है
खुद ग़मगीन हो उसके होंठों पर मुस्कुराहट सजाना इश्क़ है
उसकी तड़प देखकर खुद तड़प जाना इश्क़ है
खुद को उसकी खुशी के लिए मिटाना इश्क़ है
Author sid
11-Feb-2021 08:46 PM
wawwww....
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Dr. Vashisth
02-May-2021 06:08 AM
Shukriya aapka 🙏🏻
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Rajan tiwari
11-Feb-2021 01:13 AM
वाह वाह वाह, बहुत खूब, बहुत उम्दा
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Dr. Vashisth
02-May-2021 06:08 AM
Bahut shukriya aapka 🙏🏻
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